एसकेएम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके विरुद्ध अभियोजन की मांग करता है
लखनऊ संयुक्त किसान मोर्चा भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके विरुद्ध अभियोजन चलाने की पुरजोर मांग करता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से चुनावी मतदाता सूची में असंवैधानिक हस्तक्षेप कर, 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13 करोड़ मतदाताओं को बिना पारदर्शिता के मतदाता सूची से हटाया है, जो देश की चुनावी प्रक्रिया में आपराधिक हस्तक्षेप उजागर करता है।
अत्यधिक विवादित देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पहला चरण जून से सितंबर 2025 के बीच शुरू किया गया था, जिसे मुख्य रूप से बिहार में लागू किया गया। बड़ी संख्या में वास्तविक नागरिकों, विशेषकर अल्पसंख्यकों और विपक्षी दलों के समर्थकों को उनके मतदान के अधिकार से अवैध रूप से वंचित कर दिया गया, ताकि सत्तारूढ़ दल (भाजपा) के हित में चुनावी धांधली को सुगम बनाया जा सके। यह देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है। मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए एकतरफा और अधिनायकवादी कृत्य देशद्रोह के समान हैं। भविष्य में किसी भी आक्रामक नौकरशाह द्वारा इस प्रकार की संभावित कार्रवाई के विरुद्ध सबक स्थापित करने के लिए उनके विरुद्ध कानून के अनुसार उचित अभियोजन चलाया जाना चाहिए। प्रत्येक योग्य नागरिक सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग कर सके, यह सुनिश्चित करने की अंतिम कानूनी और व्यावहारिक जिम्मेदारी सरकारी तंत्र (प्रशासन) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की है। एसकेएम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को तत्काल रोकने तथा फॉर्म 6 में किए गए संशोधन को वापस लेने की पुरजोर मांग करता है। इसके अलावा, अवैध रूप से मताधिकार से वंचित किए गए सभी व्यक्तियों की पहचान की जानी चाहिए और उनके मतदान के अधिकार बहाल किए जाने चाहिए।भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2 मार्च 2023 को निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला दिया था। इसके अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति एक उच्चस्तरीय चयन समिति द्वारा की जानी चाहिए, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल हों। दिसंबर 2023 में संसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 पारित किया। इस कानून ने चयन समिति की संरचना में बदलाव करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया। इससे मोदी सरकार के लिए चयन समिति में प्रभावी रूप से 2:1 का सरकारी बहुमत स्थापित हो गया। ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली चयन समिति द्वारा की गई थी। एसकेएम की पुरजोर मांग है कि CECOC अधिनियम 2023 में तत्काल संशोधन किया जाए और चयन समिति की संरचना में प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री की जगह भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तावित किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस महीनों के दौरान तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 अवसरों पर पारदर्शिता, जवाबदेही और देश की सर्वोच्च चुनावी संस्था के लोकतांत्रिक कामकाज को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। ये आपत्तियां मतदाता जोड़ने, मतदाताओं के नाम हटाने, नामों की बहाली, SIR के संचालन तथा केंद्रीकृत मतदाता सूची डेटाबेस के प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर थीं। यह खुलासा साबित करता है कि भारत निर्वाचन आयोग लोकतंत्र की संवैधानिक भावना को बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक मतदान अधिकारों का सम्मान करने में विफल रहा है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट करने की एक राजनीतिक साजिश है और लोगों का ECI से विश्वास उठ गया है, जबकि भारत में लोकतंत्र की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। ECI के भीतर उत्पन्न इस संकट के लिए मोदी सरकार और RSS-BJP नेतृत्व सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। SKM किसानों, खेत मजदूरों और सभी मेहनतकश लोगों से आह्वान करता है कि वे देशभर में उभर रहे व्यापक संयुक्त जनांदोलनों में शामिल हों और संविधान तथा नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करने वाली अधिनायकवादी मोदी सरकार के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करें।