साक्षात्कार में श्री अस्थाना ने बताया कि वरिष्ठ रंगकर्मी हल्लो भइया नाटक के दौरान चीखने लगे थे

अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय लखनऊ  
लखनऊ 27 सितम्बर। माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी की कला संवर्धन-संरक्षण की नीति के अनुपालन में एवं माननीय मंत्री संस्कृति एवं पर्यटन श्री जयवीर सिंह जी की प्रेरणा व मार्गदर्शन में तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह एवं निदेशक राज कुमार जी की कुशल परिकल्पना एवं संयोजन में संस्कृति विभाग के उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अकादमी अभिलेखागार हेतु साक्षात्कार एवं स्टूडियो रिकॉर्डिंग, रविवार 27 सितम्बर को गोमती नगर विपिन खंड स्थित अकादमी स्टूडियो में की गई। इसमें ‘‘रंगमंच और सामाजिक परिवर्तन’’ विषय पर रंगकर्म विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित भारतेन्दु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक एवं अकादमी सम्मान से अलंकृत वरिष्ठ रंगकर्मी पुनीत अस्थाना से भारतेन्दु नाट्य अकादमी के प्रवक्ता मनोज मिश्रा ने सारगर्भित वार्ता की।
वरिष्ठ रंगकर्मी पुनीत अस्थाना के अनुसार सामाजिक परिवर्तन में रंगमंच की महती भूमिका है। श्रेष्ठ रंगकर्म न तो पूरी तरह से अपना संदेश सीधे सीधे दर्शकों पर थोप देता है और न ही वह उसे बहुत ज्यादा लाग लपेट के साथ प्रस्तुत करता है। रंगकर्म का मूल ध्येय ऐसा सशक्त संचार स्थापित करना है जो मंच से उठकर सीधे दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग पर छा जाए। उसके बाद दर्शक सही गलत का निर्णय करे। उन्होंने एक प्रसंग बताया कि संध्याछाया नाटक के अंत में विदेश में बस गए बच्चों के कारण, भारत में नीरस जिंदगी बिता रहे वृद्ध-दम्पति आत्महत्या कर लेते हैं। यह दु:ख अंत देख कर वरिष्ठ रंगकर्मी हल्लो भइया इतने अधिक भावुक हो गए थे कि वे “नहीं यह नहीं हो सकता” कहते हुए ऑडिटोरियम से निकल गए थे। दूसरी ओर उन्होंने बताया कि रंगकर्म दिव्यांग जनों को भी होनहार बना रहा है वहीं अंतर्मुखी बच्चों को मुखरित भी कर रहा है। उन्होंने थिएटर के नए लेखकों की प्रशंसा की वहीं नाट्य प्रस्तुतियों के प्रदर्शन स्थल को लेकर नए प्रयोगों की आवश्यकता पर जोर भी दिया। इस अवसर पर अकादमी की ओर से डॉ पवन कुमार ने कार्यक्रम का संयोजन एवं आमंत्रित अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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