18 जून को देशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन

अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय लखनऊ 
लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश तथा अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2010 में विभिन्न राज्यों तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त कराने और उन्हें विधायी एवं नीतिगत संरक्षण दिलाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। महासंघ के अनुसार, 18 जून 2026 को देश के सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। प्रदर्शन के उपरांत जिला अधिकारियों के माध्यम से भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। साथ ही संसद के मानसून सत्र से पूर्व देशभर के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा तथा संसद में आवश्यक विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान किए जाने की मांग की जाएगी। महासंघ का कहना है कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को न्यूनतम योग्यता के रूप में अधिसूचित किया गया था, जबकि उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था 27 जुलाई 2011 से लागू हुई। इससे पहले देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रचलित नियमों, निर्धारित योग्यताओं और चयन प्रक्रियाओं के आधार पर विधिवत रूप से की जा चुकी थीं।
संगठन ने कहा कि हाल ही में 29 मई 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में अपने भविष्य और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। महासंघ का मानना है कि किसी भी नए नियम, अधिसूचना या नीति को पूर्व प्रभाव से लागू करना भारतीय विधिक व्यवस्था के स्थापित सिद्धांतों, प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता (Legal Certainty) के विपरीत है। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने वर्षों तक विद्यालयों में शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जागरूकता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे शिक्षकों के सेवा अधिकारों को किसी भी प्रकार से प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं होगा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), जो देश का एक प्रमुख शिक्षक संगठन है और जिसके 14 लाख से अधिक सदस्य हैं, ने केंद्र सरकार से मांग की है कि टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को स्पष्ट रूप से स्थायी कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए, जिससे उनके सेवा हित और भविष्य सुरक्षित रह सकें।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार द्वारा समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। देशभर के शिक्षक संगठन इस मुद्दे पर एकजुट होकर शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।

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