विधवा को नहीं मिला मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ :विजय कुमार पाण्डेय
अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय लखनऊ
लखनऊ सुलतानपुर के ग्राम राईबीगो (मुरारपुर), तहसील कादीपुर की निवासिनी शारदा पाण्डेय के साथ प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है, जहां उनके पति की सड़क दुर्घटना में हुई आकस्मिक मृत्यु 31 मई 2024 के बाद भी उन्हें सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ अब तक नहीं मिल सका है। अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय ने प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया कि, स्वर्गीय अनिल कुमार एक पंजीकृत कृषक थे, जिनका नाम राजस्व अभिलेखों में विधिवत दर्ज था । 31 मई 2024 को वे लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु सिविल हास्पिटल लखनऊ में हो गई। उस समय उनकी आयु लगभग उनसठ वर्ष थी। वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और पूरी तरह खेती-किसानी पर निर्भर थे। अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि परिवार के एकमात्र कर्ता-धर्ता उसके पति ही थे जिनके आकस्मिक निधन ने परिवार के सामने विकट स्थिति उत्पन्न कर दी इसलिए परिवार को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए मृतक की आश्रित पत्नी शारदा पाण्डेय, ने 19 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत रुपए पांच लाख की आर्थिक सहायता हेतु आवेदन किया। जिसकी विधिवत जांच रिपोर्ट 06 सितम्बर 2024 में राजस्व विभाग ने पाया कि, आवेदिका के पति एक पात्र पंजीकृत कृषक थे, उनकी मृत्यु दुर्घटना के कारण हुई तथा आवेदिका योजना के अंतर्गत पूर्णतः पात्र लाभार्थी हैं। पीड़िता द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचनामा, आधार कार्ड, बैंक पासबुक एवं राजस्व अभिलेख समय से जमा कर दिए गए और संबंधित अधिकारियों द्वारा उनका सत्यापन भी कर लिया गया। इसके बावजूद आज तक सहायता राशि का भुगतान नहीं किया गया है। योजना के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, दुर्घटना में मृत्यु होने पर मृतक कृषक के आश्रित को रु.पांच लाख की आर्थिक सहायता दी जानी है, लेकिन इस प्रकरण में सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने और विभागीय सिफारिश के बावजूद भुगतान लंबित है। विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि मामला प्रशासनिक उदासीनता और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही गंभीर देरी को उजागर करता है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है। अब पीडिता के सामने अदालती कार्यवाही के आलावा कोई विकल्प शेष नहीं बचता l