मछुआ समाज के विभीषणों ने समाज को दूसरी पार्टियों में गिरवी रखा


 अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय लखनऊ लखनऊ  निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल “निषाद पार्टी” द्वारा निकाली गई संवैधानिक अधिकार यात्रा 39वें दिन जनपद गोरखपुर में पाँचवें दिन पादरी बाज़ार से प्रारंभ हुई, निषाद पार्टी-राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मा० कैबिनेट मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद जी के नेतृत्व में यात्रा डोमिनगढ़ से घुनघुन कोठा मँझरिया, उतरासोत, जामुआड से गुरु नगर, भौरमल, चकरा, रोहुआ से डोहरिया बाज़ार से मजनू चौराहा से सिंघोंराव बाज़ार से जंगल कौड़िया, परसोना आभूराम से जसवल से भरोईया से पीपिगंज तीघरा, मछारिया पुल से महुआसर से चरकहवा से अलगटपुर से सुरस से जंगल बब्बन से मछली गाँव से कैंपियरगंज से कर्मैहनी से घगवा चौराहा तक निकलो गई। श्री निषाद जी ने रथ यात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा कैंपियरगं में मछुआ समाज के “युवाओं का जोश हाई है”, जनपद गोरखपुर में जबसे यात्रा ने प्रवेश किया है लग रहा है कि हर विधानसभा के युवाओं और कार्यकर्ताओं ने ठान लिया है कि हर दिन एक दूसरे के रिकॉर्ड को तोड़ना है, श्री निषाद जी ने कहा कि निषाद पार्टी आरक्षण के मुद्दे पर बनी थी आज भी आरक्षण के मुद्दे पर अडिग है, और युवाओं का जोश बता रहा है निषाद पार्टी और डॉ संजय अपने मुद्दे को लेकर आज भी गंभीर है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि निषाद समाज दूसरी पार्टियों के कई विभीषण पहले ही निषाद समाज के मछुआ एससी (संवैधानिक, राजनीतिक और सामाजिक) आरक्षण को बेच के खा गये है, गोरखपुर और आस पास के जनपदों से ही स्वर्गीय जमुना निषाद जी के निधन के पश्चात कई मंत्री बने है, किंतु मछुआरों के आरक्षण के मुद्दे पर चुप्पी साधने और लोगो को भ्रमित करने के अलावा कुछ नहीं किया है, श्री निषाद जी ने कहा कि निषाद पार्टी मछुआ समाज के आरक्षण के मुद्दे पर बनाई गई थी क्योंकि सभी नेता और पार्टियो ने जब मछुआ समाज को आरक्षण के नाम पर ठगने का काम किया साथ ही इन्ही समाज के धोखेबाज़ों ने समाज को कभी सपा, बसपा, कांग्रेस व अन्य पार्टी में बेचने का काम किया, श्री निषाद जी ने स्पष्ट किया कि निषाद पार्टी और डॉ संजय पद प्रतिष्ठा के लिए नहीं बने हैं, वो तो सभी पार्टियों से अपील करते है कि आप मछुआ समाज को आरक्षण दे दीजिए बाक़ी आरक्षण के बदले मंत्री पद से लेकर सब कुछ न्योछावर करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी अपनी पूँजी को गिरवी और बेचकर राजनीति नहीं करने आई है, आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन हुआ था, और आज भी हम प्रदेश में आरक्षण को लेकर संवैधानिक अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं, क्योंकि सरकार में वो सहयोगी हैं और सरकार को अपने सहयोग की भावना और समाज के मुद्दे को बताने का भी हक़-अधिकार उनके पास है। 
उन्होंने कहा कि मछुआ समाज के विभीषण के चलते ही गोरखपुर लोकसभा सीट कभी 3लाख के अधिक मतो से जीत दर्ज करती आई है, लोकसभा चुनाव 2024 के चुनाव में मात्र 1 लाख के अंतर से जीत पाई, आख़िर इसके पीछे के कारण क्या रहे हैं इसको पता करना होगा, आख़िर क्यों निषाद भाजपा से रुष्ट हुए इसको जानना होगा, आख़िर किन विभीषणो में निषाद महाकुंभ के बहाने गोरखपुर के निषाद समाज को भड़काने का काम किया। श्री निषाद जी ने कहा कि 2024 के चुनाव से पूर्व निषाद समाज के सभी विभीषण, ठग और धोखेबाज़ों ने निषाद पार्टी का विरोध करना शुरू कर दिया, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि निषाद पार्टी का विरोध अगर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी या अन्य कोई पार्टी करती तो समझ आता की निषाद पार्टी के बढ़ने से वो लोग सत्ता से बेदख़ल हो गये हैं किंतु चुनाव से पूर्व हमारे बड़े सहयोगी दल के निषाद/कश्यप नेता ही निषाद पार्टी का विरोध कर रहे थे, तो निषाद समाज चुनाव में नाराज़ हुआ है। 
उन्होंने कहा कि कोई इस ग़लतफ़हमी में ना रहे कि ई० प्रवीण निषाद चुनाव हार गये हैं तो निषाद समाज का प्रेम और साथ निषाद पार्टी को नहीं मिला है, श्री निषाद जी ने चैलेंज देते हुए कहा कि संत कबीर नगर लोकसभा सीट की हार प्रवीण निषाद या निषाद पार्टी की नहीं है, जिसके प्रत्याशी थे प्रवीण वो पार्टी वहाँ चुनाव हारी है, निषाद समाज ने 2019 की लोकसभा से बेहतर समर्थन देकर जबकि विपक्ष से भी निषाद प्रत्याशी था उसको नज़रअंदाज़ कर निषाद पार्टी का साथ देने का काम किया है, उन्होंने कहा वो सभी नेताओ को चैलेंज देते है कि आइये निषाद बूथ का डाटा लेकर वो और कोई भी नेता खुले मंच से बहस करे आख़िर प्रवीण निषाद कैसे हारे। श्री निषाद जी ने चटकीले अन्दाज़ में कहा कि बात खुलेगी तो बात दूर तक जाएगी, 100 आरोपों के जवाब से बेहतर अच्छी है मेरी चुप्पी ठीक है।

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