शौर्य दिवस - भीमा कोरे गांव के संदर्भ में पीडीए सम्मेलन संपन्न हुआ
लखनऊ , दलित शोषित, पीडीए समाज को कभी शिक्षा पाने का भी अधिकार नहीं था, आज वह समाज शिक्षित होकर स्वयं शिक्षा देने लायक होने लगा। अपमानित होने अथवा मार खाने के बाद, जिसकी पीड़ा कोई सुनने वाला नहीं होता था वह समाज आज पुलिस इंस्पेक्टर, कप्तान, मजिस्ट्रेट-जिला मजिस्ट्रेट, जज और जस्टिस होने लगा तथा MLA, MP और मंत्री-मुख्यमंत्री भी होने लगा। इस ऐतिहासिक परिवर्तन का असली केन्द्र बिन्दु पूना के भीमा कोरे गांव का वह निर्णायक युद्ध है, जिसे बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर के पुरखों ने लड़ा था। यह ऐतिहासिक युद्ध 01 जनवरी, सन् 1818 को लड़ा गया था। सन् 1757 में प्लासी का युद्ध लड़कर भारत में सामाजिक परिवर्तन की जिस लड़ाई का आगाज बाबा साहेब डा० भीमराव अम्बेडकर के पुरखों ने कर दिया था, उसे उन्ही वीर पुरखों की संतानों ने 01 जनवरी, सन् 1818 को भीमा कोरे गांव पूना का निर्णायक युद्ध लड़कर अंजाम तक पहुंचा दिया। हम आभारी है उन शूरवीरों का और उनके पराक्रम का जिनके बदौलत हम सदियों की गुलामी और उत्पीड़न से मुक्ति पा सके हैं। इस पावन अवसर पर उन वीर सपूतों को याद करने व उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए 01 जनवरी, 2025 को समय 12.00 बजे लखनऊ सहकारिता भवन में पीडीए सम्मेलन आयोजित किया गया है। सम्मेलन के मुख्य अतिथि आर० के० चौधरी, सांसद समाजवादी पार्टी मोहनलालगंज व पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार सहित प्रमुख नेतागण सम्बोधित करेंगे। अतः आप सभी बुद्धजीवियों, समाजवादी चिन्तकों एवं समर्थकों से अनुरोध है कि समय से पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने का कष्ट करें।