खनौरी सीमा पर किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 37वें दिन में प्रवेश कर गई है।



 अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय लखनऊ 
पंजाब के संगरूर जिले में खनौरी सीमा पर किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 37वें दिन में प्रवेश कर गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह बयान कि सरकार किसानों की मांगों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी, निंदनीय है। किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले किसान अन्य मांगों के साथ-साथ दो महत्वपूर्ण मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य( एम एस पी) पर उनकी फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी।  
किसानों के प्रति थोड़ी भी चिंता रखने वाली सरकार को उनके लिए कानूनी गारंटी सुनिश्चित करके इन न्यूनतम मांगों को स्वीकार करना चाहिए था। शीर्ष अदालत का काम ऐसे कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच करना है। इसलिए फासीवादी शासन का यह कदम, जिसे कॉर्पोरेट कृषि व्यवसाय कंपनियों की सेवा करने में किसी भी हद तक जाने में कोई हिचकिचाहट नहीं है, जैसा कि कठोर कृषि कानूनों के मामले में साबित हुआ था, अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ने वाला एक चालाक कदम है। इसलिए, मोदी सरकार के किसान विरोधी दृष्टिकोण की कड़ी निंदा करते हुए, सीपीआई (एमएल) रेड स्टार उन दोनों किसान संगठनों और कृषि श्रमिक यूनियनों के साथ एकजुटता से खड़ा है, जो 13 फरवरी, 2024 से पंजाब और हरियाणा की अंतर-राज्य सीमा पर अपनी मांगों को लेकर डेरा डाले हुए हैं। साथ ही हम तमाम प्रगतिशील-जनवादी ताकतों से किसानों और किसान नेता दल्लेवाल की अनिश्चितकालीन हड़ताल के साथ एकजुटता से खड़े होने का आह्वान करते हैं ।


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