आसान हो रही गोद लेने की प्रक्रिया टेम्पल ऑफ हीलिंग में शाखिल की थी सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका



 अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय लखनऊ 
 लखनऊ 12 दिसंबर। देशका के कोने और समझाने में सम्बंधित की हीलाहवाली से बच्चो को गोदकक्रियाबरही पर अब इस प्रक्रिया में रात आ रही है। कि आपकी क्रियाको और केकीकोर्ट में अगस्त 2021 में जनहित याचिका दाखिल की थी। इसे कठिन राह आसान हुई स्थल संज्ञान में लिया और 12 से अधिक सुनवाइयों के बाद उसके आदेशों से और राज्य सरकारी सेवा तलब किया। कोर्ट ने युवतियों को बच्चा गोद लेने के लिए लीन बार साल इलाका सही नहीं कहते हुए प्रक्रिया सही करने की आवश्यकता बतायी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश से ये श्री साफ किया है कि हिन्दू दत्तक कानून में सुविनाइल जस्टिस एक्ट 2015 सेक्शन 50(3) के अनुसार वाकल रेगुलेशस 2022 का कोई दखल नहीं है।डा सक्सेना के कचनानुसार ऐसे में बच्चा गोद लेना बहुत आसान हो जाता है। इसी क्रम में कोई में देश के सभी 750 जिलों में दत्तक ग्रहण एजेशिया नियुक्त करने को कहा। उन्होंने बताया कि सख्त कानून होने के बावजूद अमेरिका से हर साल एक लाख 35 हजार बच्चे गोद लिये जाते हैं, जबकि भारत में उलझी हुई प्रक्रिया के कारणा बमुश्किल पति वर्ष चार हजार। देश में 31 करोड़ बच्चे अनाथ हैं, वहीं ढाई करोड से भी बहुत ज्यादा दंपतिया संतान सुख के लिए तरसती है। हर बच्चे का अधिकार है कि उसे परिवार मिले हमारी याचिका इन दोनों के बीच सेतु बनी। यह कदम उन लाखो अनाथ बच्चों और संतान सुख से वंचित दंपतियों के लिए आशा की किरण बना, जो एक बेहतर अतिभ्य की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई राज्यों ने अपनी गोद लेने की नीतियों पर पुनर्विचार भी शुरु कर दिया है। इसी वर्ष 20 अगस्त से अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा या कानूनी रूप से अलग रह रहे 35 से 60 साल की उम्र के अकेले लोगों को भी बच्चे को गोद लेने की अनुमति दे दी गयी है। उन्होंने बताया कि याचिका के कम में गोद लेने की प्रक्रिया के सरलीकरण और डिजिटलीकरण से लबी और अहिल प्रक्रियाओं पर विरास लगेगा। साथ ही पारदर्शिता बढ़ने से गोद लेने योग्य बच्चों और इच्छुक माता पिता के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा और गोद लेने के प्रति समाज में व्याप्त भालियों को दूर होगी। इस मुद्दे पर अब मीडिया और समाज में चर्चा लेज हो गई है, जिससे सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आगे उनका संगठन अविवाहित, एलजीबीटी और अन्य समुदायों को भेदभाव मुक्त गोद लेने का अधिकार सुनिश्चित करने पर काम करेगा। गोद लेना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, यह एक सामाजिक जिम्मेदारी है।

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