सुप्रीम कोर्ट के आदेश से स्पष्ट है कि आवासों को बुलडोज करने की कार्रवाई गैरसंवैधानिक


 अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय  लखनऊ 
लखनऊ: बुलडोजर न्याय पर रोक सम्बंधी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागतयोग्य”- यह बात आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने प्रेस को जारी बयान में कही है। एआईपीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि आवास परिवार का मौलिक अधिकार है जिससे उसे कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना वंचित नहीं किया जा सकता। इसी संबंध में उसने आगे कहा है की किसी व्यक्ति के आरोपित अथवा दंडित हो जाने पर आप उसके परिवार को सामूहिक तौर पर दंडित नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि कार्यपालिका न्यायपालिका की भूमिका नहीं निभा सकती। सर्वोच्च न्यायालय ने कानून के राज के महत्व पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि कानून का राज मनमानी कार्रवाही करने की अनुमति नहीं देता। इसी संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी संपत्ति नोटिस के बिना नहीं गिराई जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यपालिका की मनमानी तथा गैर कानूनी कार्रवाही रोकने के लिए अवैध रूप से विध्वंस करने वाले अधिकारियों को विभागीय, आपराधिक तथा आर्थिक रूप से दंडित करने का आदेश भी दिया है। 
सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में किसी भी प्रकार के विध्वंस करने के संबंध में दिशा निर्देश दिए हैं जिनका अनुपालन करना अनिवार्य है। इसका अनुश्रवण करने के लिए संबंधित जिलाधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है।
आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट है कि योगी राज में बुलडोज करने की कार्रवाई गैरसंवैधानिक थी। इसलिए इस तरह की सभी कार्रवाई की जांच कराकर जबावदेही तय करेगी और इसे करने वाले दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाएगा। साथ ही गैर कानूनी कार्रवाही के मामलों में मकान मालिकों को उचित मुआवजा दिया जाए। एआईपीएफ यह भी आशा करता है कि सुप्रीम के उक्त निर्णय का योगी सरकार सम्मान करेगी और उत्तर प्रदेश में बुलडोजर राज की पूर्णतया समाप्ति कर कानून के राज की स्थापना करेगा 

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