असम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्याय की जीत: मोहम्मद आफ़ाक़

अजय कुमार गुप्ता सोशलिस्ट न्याय लखनऊ 
लखनऊ: 18 अक्टूबर (प्रेस विज्ञप्ति) राष्ट्रीय सामाजिक कार्य कर्ता संगठन के संयोजक मुहम्मद आफ़ाक़ ने कल असम के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लोगों का विश्वास बढ़ेगा संवैधानिक पीठ ने असम में नागरिकता को लेकर डर और आशंका के बादल दूर कर दिए हैं, इस फैसले से समाज में रहने वाले हर व्यक्ति को फायदा होगा. उन्होंने कहा कि नफरत और भेदभाव की राजनीति के इस दौर में जहां एक तरफ ऐसे लोग हैं ऐसे मुद्दे उठाते हैं और धार्मिक कट्टरवाद और नफरत को भड़काते हैं, जबकि संवैधानिक पीठ के फैसले से पता चलता है कि हमारे देश में अभी भी न्यायाधीश बचे हैं। सांप्रदायिक ताकतें इस कोशिश में थीं कि किसी तरह अनुच्छेद 6ए रद्द हो जाए, क्योंकि ऐसा होने पर पचास लाख मुसलमानों की नागरिकता ख़तरे में पड़ जाती. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें आए दिन मुसलमानों के खिलाफ जहर उगल रही हैं, दरअसल ऐसा करके वे राज्य के हिंदू-मुसलमानों के बीच नफरत की खाई पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे आसानी से पाटा जा सकता है लेकिन आज जो फैसला आया है. यह न केवल ऐतिहासिक और असामान्य है, बल्कि इसने उन सांप्रदायिक तत्वों की भावनाओं को भी जन्म दिया है जो इस उम्मीद में पागल हो रहे थे कि अनुच्छेद 6ए के निरस्त होने के बाद मुसलमानों को विदेशी घोषित कर दिया जाएगा और उन की धन धरती छीन ली जाएगी राज्य से बाहर निकाल दिया जाएगा , अंत में मुहम्मद आफ़ाक़ ने कहा कि प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है कि वह अपना कानूनी दस्तावेज बनाने में आलस्य न बरतें बल्कि अपना अपने परिवार और अपने पड़ोसी का दस्तावेज बनाने के लिए हर संभव प्रयास करें ताकि सांप्रदायिक शक्तियां अपनी साजिश में सफल न हो सकें।

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